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लेखनी प्रतियोगिता -25-Nov-2022

पर्वत कहता शीश उठाकर 

तुम भी ऊँचे बन जाओ
सागर  कहता है लहरा कर 
मन मे गहराई लाओ

समझ रहे हो क्या कहती है
उठ उठ गिर गिर तरल तरंग
भर लो भर लो अपने दिल मे 
मीठी मीठी मृदुल उमंग

पृथ्वी कहती धैर्य ना छोडो
कितना  ही हो सिर पर भार 
नभ कहता है फैलो इतना 
ढक लो सारा संसार 
- अभिलाषा देशपांडे


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4 Comments

Haaya meer

26-Nov-2022 07:20 PM

Superb

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Punam verma

26-Nov-2022 08:28 AM

Very nice

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Abhinav ji

26-Nov-2022 07:35 AM

Very nice👍

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